प्राचार्य
शिक्षा किसी भी विकसित समाज का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। यह किसी भी राष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। ज्ञान से बड़ी कोई संपत्ति नहीं है, अज्ञान से बड़ी कोई गरीबी नहीं है, संस्कृति से बड़ी कोई विरासत नहीं है। जो सीखना नहीं चाहता, उसे कोई कुछ नहीं सिखा सकता। इतिहास इस बात का प्रत्यक्षदर्शी है कि किसी भी व्यक्ति को उसके द्वारा प्राप्त की गई चीजों के लिए कभी सम्मानित नहीं किया जाता। सम्मान उसके द्वारा दिए गए उपहारों का पुरस्कार है। विद्यार्थी ताजे फूल हैं और शिक्षक माली। प्रत्येक विद्यार्थी प्रिय है और शिक्षक के हृदय में सभी का विशेष स्थान है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों के माध्यम से अपने सपनों को पूरा होते देखना चाहता है। विद्यालय की छवि विद्यार्थियों द्वारा ही बनाई जाती है। विद्यार्थी ही विद्यालय को गौरव और गौरव दिला सकते हैं। एक सफल शिक्षक वह होता है जो रचनात्मक सोच को बढ़ावा दे, कौशल विकसित करे और साथ ही विद्यार्थियों में आजीवन सीखने की इच्छा पैदा करे। यदि डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और अन्य पेशेवर एक अच्छी शिक्षण व्यवस्था के गौरवशाली उत्पाद हैं, तो शिक्षण का कार्य स्वयं पुरस्कृत है।